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बेलिंघम की डबल से इंग्लैंड सेमीफाइनल में, नॉर्वे बाहर
जूड बेलिंघम ने बड़े मंच पर कमाल दिखाया और दो गोल दागकर इंग्लैंड को विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचा दिया। यह मुकाबला बेहद टैक्टिकल और धैर्य की परीक्षा लेने वाला रहा, जहां सूक्ष्म अंतर और एक्स्ट्रा टाइम की नजाकत ने नतीजा तय किया। बेलिंघम भले सुर्खियों में रहे, पर इंग्लैंड की सामूहिक मजबूती और बेंच की धार ने भी बराबर योगदान दिया।
नियमित समय तक खेल सतर्कता के साथ चला। दाएं विंग से आए सब्स्टीट्यूट बुकायो साका ने 78वें मिनट में खतरनाक क्रॉस से हलचल मचाई, जो गोलमाउथ से होते हुए निकल गया। कुछ देर बाद उन्होंने लो क्रॉस से एक और बड़ा मौका बनाया, लेकिन टीममेट्स तक गेंद नहीं पहुंची। इस दबदबे के बावजूद 90 मिनट बिना गोल खत्म हुए।
अंतिम पलों में ड्जेड स्पेंस ने नॉर्वे के गोलकीपर ऑर्यन नायलैंड पर जोरदार प्रेस किया और लगभग गलती करवाकर गोल बना देते, मगर मौका हाथ से निकल गया। एक्स्ट्रा टाइम में बेलिंघम फिर निर्णायक साबित हुए; उनके दूसरे गोल ने मैच का रुख मोड़ा। इसके बाद VAR ने एक पेनाल्टी, जो स्पेंस पर फाउल के लिए इंग्लैंड को मिली थी, की समीक्षा कर उसे रद्द कर दिया, जिससे रोमांच चरम पर पहुंच गया।
टूर्नामेंट के शीर्ष स्कोरर में शामिल एरलिंग हालांड को एक्स्ट्रा टाइम के हाफ के बाद बदलना पड़ा, जिससे नॉर्वे की धार कम हुई। इसके बावजूद स्टाले सोलबाकेन् की टीम ने बराबरी के लिए आगे बढ़कर दबाव बनाया, लेकिन इंग्लैंड की डिफेंस ने तटस्थता और संयम दिखाते हुए जीत संभाल ली।
यह जीत इंग्लैंड को 1966, 1990 और 2018 की तरह फिर से अंतिम चार में ले जाती है। हार के बाद भावुक सोलबाकेन् ने कहा, “मुझे लड़कों के लिए बुरा लग रहा है—यह एलीट खेल का चमक और क्रूरता दोनों है। हमने एक शानदार टीम के खिलाफ शानदार खेला, पर बस हो नहीं पाया।” अब इंग्लैंड सेमीफाइनल में आत्मविश्वास और लय के साथ उतरेगा, जबकि नॉर्वे सिर ऊंचा रखकर बाहर हुआ।