जापान इस मुकाबले में छह लगातार जीत, पाँच मैचों की क्लीन शीट और सात मैचों से अजेय क्रम के साथ उतर रहा है। सातों मैचों में गोल करने का उनका सिलसिला लय और अनुशासन दोनों को दिखाता है। चुनौती है नीदरलैंड्स के मैदान पर, जहाँ हालिया आमने-सामने के रिकॉर्ड में बढ़त मेज़बानों की है—पिछली तीन भिड़ंतों में वे अपराजित रहे हैं (2 जीत, 1 ड्रॉ; आख़िरी 2-2)। औसतन नीदरलैंड्स जापान के खिलाफ 2.0 गोल करते हैं जबकि जापान 0.67 पर रुकता है।
सबसे बड़ा निर्णायक कारक पहला गोल हो सकता है। जब जापान बाहर 0-1 से आगे होता है, तो उनकी जीत 100% रही है; पर जब बाहर 1-0 से पीछे होते हैं, तो वापसी नहीं कर पाए हैं। नीदरलैंड्स घर पर 1-0 की बढ़त को 60% मौकों पर जीत में बदलते हैं और 0-1 से भी आधे मैचों में पलटवार कर लेते हैं—ये जुझारूपन और घरेलू माहौल का संकेत है।
पहला हाफ़ संतुलित रह सकता है—दोनों टीमें 50% पहले हाफ़ जीतती हैं। मेज़बानों के लिए चौड़ाई बनाना, फ़्लैंक से सप्लाई और तेज़ स्विचिंग जापान की सघन ब्लॉक को तोड़ने की कुंजी होगी। सेट-पीस भी बड़ा हथियार बन सकते हैं। जापान ट्रिगर-प्रेस, तेज़ ट्रांज़िशन और समय पर स्पेस में दौड़ों पर निर्भर है—इन्हीं से उनकी लगातार स्कोरिंग संभव हुई है।
कहानी है फ़ॉर्म बनाम फ़ेस-ऑफ़ इतिहास। जापान के पास ताज़ा रफ़्तार, अनुशासन और दक्षता है; नीदरलैंड्स के पास इस जोड़ी में ऐतिहासिक बढ़त और घरेलू सहारा। पिछला 2-2 बताता है कि यह जोड़ी अनिश्चितताओं से भरी है और मैच खुला तो उतार-चढ़ाव बढ़ेंगे।
अनुमान के मुताबिक अगर जापान पहले गोल कर देता है तो उसके नियंत्रण की संभावना अधिक होगी। अगर नीदरलैंड्स बढ़त बनाता है तो सेट-पीस और टेम्पो-कंट्रोल से वे फ़िनिशिंग लाइन देख सकते हैं, हालांकि जापान की मौजूदा तीव्रता अंतर कम रख सकती है। समग्र रूप में जापान के ‘न हारने’ की संभावना बेहतर दिखती है, जबकि ड्रॉ या एक गोल का फ़ासला सबसे वास्तविक नतीजा लगता है।