स्वीडन बनाम ट्यूनिसिया में पहला गोल निर्णायक दिखता है। घर पर 1-0 की बढ़त लेने पर स्वीडन 100% मैच जीतता है, जबकि 0-1 से पीछे होने पर कभी जीत में नहीं बदला। ट्यूनिसिया भी बाहर 1-0 से पिछड़ने पर वापसी नहीं कर पाता। जब दोनों टीमें घाटा पलटने में कमजोर हों, तो शुरुआती बढ़त ही अंतर बना सकती है।
फ़ॉर्म में विरोधाभास है। स्वीडन ने लगातार 11 मैचों में गोल खाया है—रक्षा कमजोर—पर उसने 6 मैचों से हर बार गोल भी किया है—आक्रमण भरोसेमंद। ट्यूनिसिया लगातार 3 मैचों से गोल करने में नाकाम रहा है, उसे तुरंत सूखा तोड़ने की जरूरत है। इसके बावजूद, ट्यूनिसिया आमतौर पर तेज शुरुआत करता है: पहले हाफ में 45% जीत, जबकि स्वीडन का 30%। पिछली भिड़ंत में भी ट्यूनिसिया एक गोल से जीता था। विश्व कप के इतिहास में ट्यूनिसिया का प्रदर्शन बेहतर रहा, हालांकि हाल के 5 मैचों में स्वीडन की समग्र फ़ॉर्म मजबूत है।
रणनीति में शुरुआती 20 मिनट महत्वपूर्ण होंगे। स्वीडन को हाई-प्रेस, विंग्स से सर्विस और तेज़ डिलीवरी के जरिए जल्दी बढ़त चाहिए—घर में उसका औसत 1.2 गोल है। पहले गोल के बाद आंकड़े उसके पक्ष में हैं। मगर 11 मैचों से गोल खाते आना ट्यूनिसिया को मौका देता है। मेहमान टीम के लिए कॉम्पैक्ट ब्लॉक, ट्रांज़िशन और सेट-पीस सबसे कारगर रास्ते हैं; बाहर 0-1 की बढ़त लेने पर वे 50% बार जीत तक पहुंचते हैं।
हाफ़टाइम तक की बढ़त रुझान तय कर सकती है। ट्यूनिसिया शुरुआती चरण में बढ़त ले सकता है, पर स्वीडन की हालिया फ़ॉर्म और निरंतर स्कोरिंग से मेज़बान आखिर में बढ़त बना सकता है। औसत 1.2 (घर) बनाम 1.29 (बाहर) गोल के साथ यह कम स्कोर वाला मुकाबला लग रहा है, जहां छोटे-छोटे क्षण फ़ैसला करेंगे।
अनुमान: घर में स्वीडन को हल्का फ़ायदा, ख़ासकर अगर वह पहले गोल करे। ट्यूनिसिया के लिए तेज़ शुरुआत और गोल सूखा खत्म करना अनिवार्य है। मामूली अंतर से स्वीडन की जीत या सख़्त ड्रॉ सबसे मुमकिन नतीजे हैं।